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Bhavi Parihar

“However Hard Life Is , I will Go on” – Bhavi Parihar

मेरी कहानी मेरी जुबानी 

18 नवंबर 2001 यहााँसेशुहोती हैमेरी जदगी क कभी हसाने तो कमी आाँखेभर देनेवाली कहानी ।मेरेमाता पता नेमेरा नाम भावी जसका मतलब होता हैआनेवाला या भ व य पर शायद उ ह नेयेकभी न सोचा होगा क मेरा भ व य तीन साल क उ से ही क ठनाईय भरा होगा ।तीन साल, लोग कहतेहैतीन अशुभ अंक होता है, और इ फाक सेमेरी जदगी म इसी साल कदम रखा रके टस नाम क बीमारी नेमेरी जदगी म कदम रखा।बस फर या था इस समाज का कहना शुकर दया एक तो लड़क , उसके ऊपर चलनेम परेशानी, या होगा इसका, जैसेजैसेसमय बीता म तो बड़ी होनेलगी पर मेरा कद उतना नही बढ़ा, सभी कहनेलगेइसेआशालूखलाओ ,डंडेपर लटकाओ, टेबलेट दलाओ इतनी छोट लगेगी तो आगेजाकर कैसेचलेगा चलने म आनेवाली परेशा नय केबावजूद खेलकूद सेलेकर डांस तक मैनेहर कदम पर हर उस उठती उंगली को गलत सा बत कया क म जदगी म कभी आगेनह बढ़ पाऊाँगी। आज भी याद ह वो दन जब पहली बार मैनेटेज पर मईया यशोदा पर नृय कयाबावजूद इसके क एक दन पहलेतक मुझेचकनपॉ स आ था। आज भी नह भूल सकती अपनेपता क आाँखो सेनकलते आाँसुओ को जब चीफ गेट नेमुझेस मा नत कया और सबसे तेज ता लय क आवाज उनक 

ही थी। कूल जानेकेकई साल तक कोई 

दो त नही बन पाया मेरा, आाँखो सेआाँसूनकलतेथेजब लोग क नजरेमुझेदेखकर हैरान होती। कूल मेएक दन मैराथन केलए ब चेलेट हो रहेथे, मनेकहा मुझेभी भागना है। सब हसनेलगे

लेकन म फर भी भागी, सााँसेफूली, पैर आगेनही बढे, पर मने रेस पूरी क , और जब मैआ खरकार रेस पूरी कर प ंंची और तब पहली बार मुझेयेअहसास हआ कक इस दन 

ुनया मेकोई भी 

काम तब 

तक नामुमककन हैजब तक हम उसेहाससल करनेकी ठान ना लें।एक समय ऐसा भी आया जब चलनेमें इतनी परेशानी आनेलगी की सहारा लेना पडता, पर डांस को लेकर जो मेरा जुनून या उसनेमुझे 

हमेशा ववश्वास ददलाया की मैंककसी सेकम नही और मैंनेऑडडशन ददया और मैंटीवी राउण्ड के 

सलयेस्लेक्ट हई ।17 मई 2018 ददल की धडकन इतनी तेज हई रात भर नींद नहींआई, हाथ पााँव सून हो गयेवो ददन था मेरेऑपरेशन का पहलेबार मैंने मम्मी पापा केपााँव छूए ,जब बाहर आयी तो टूट सी गई की जो डांस मेरी जजंदगी भी क्या मैंवापस 

कभी कर पाऊाँ गी, डॉक्टर आए और उन्होनेबोला चल उठ डांस कर ,मैंवीडडयो बनाकर दसू रेमरीजेको ददखाऊाँ गा, उन्होंनेहाथ बढाया, और मेरेअंदर 

सेआवाज आई की मैंकर सकती हाँ, हर बार चुपके सेचलनेकी कोसशश करती पर मेरेपााँव इतना 

कााँपतेकी मेरी आशाओंको दहला कर रख देते। 

तीन महीनेबाद जब स्कूल गयी तो सीढीयी़ ो पेचढने केसलयेककसी का सहारा लेना पडता, और जब मुझे कहा की डांस ससखाऊाँ ,तो एक पल केसलए तो जैसेमैं भूल ही गयी की मैठीक सेचल भी नही पा रही हाँ।

अंत मेमैयही कहना चाहाँगी की मेरी जजंदगी नेकदमकदम पेमुझेपरखा है,मेरी दहम्मत का इम्तेहान सलया हैचाहेवो कुछ महीनेपहलेहए मेरेसलवर के 

ऑपरेशन की ही बात क्यूना हो।हर बार हर लडाई को इतनी ही दहम्मत सेलड़ा और जीता भी है। 

(जजतनेभी लेलेइजम्तहान तूऐ जजंदगी

दहम्मत ना हाराँगी मैंएक पल केसलए भी।

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Bhavi's Interview